GOLAKA DHAM HINDU VILLAGE in GERMANY 

Germany के इस गांव में छाई सनातन धर्म की लहर

गौलोक धाम जर्मनी जहां पर भगवान श्री कृष्ण और भगवान श्री राम की भक्ति के माध्यम से सनातन धर्म अपनाने वालों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है और पूरे गांव में सनातन धर्म की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति जागृत हो रही है जिसके कारण जर्मनी के लोग अपनी शान और शौकत की जीवन शैली का खुशी-खुशी त्याग करके सनातन धर्म अपना रहे हैं जर्मनी के इस गांव का यह मनमोहक दृश्य देखकर ऐसा लग रहा है कि मानो यूरोप के दूसरे हिंदू गांव की तरह जर्मनी में भी कलयुग की समाप्ति और सतयुग की शुरुआत हो चुकी है।

जर्मनी के इस गांव में हजारों जर्मन हिंदू हर रोज भगवान श्री राम और भगवान श्री कृष्ण का कीर्तन कर रहे हैं और पूरे जर्मनी के लोगों को यह खुलेआम निमंत्रण दे रहे हैं कि उनको भी भगवान श्री कृष्ण और भगवान श्री राम के नाम का जप करना चाहिए साथ में ही गौ माता की सेवा और श्रीमद् भगवत गीता और रामायण पढ़नी चाहिए 

यदि आप को विश्वास नहीं है तो Google Map में location देखे-

दोस्तों अब यहां पर प्रश्न यह उठता है कि जर्मनी में यह हिंदू गांव कहां पर मौजूद है और क्यों यहां के लोग भगवान श्री राम और भगवान श्री कृष्ण की भक्ति के माध्यम से सनातन धर्म अपना रहे हैं और जर्मनी में लोगों को सनातन धर्म का प्रचार करने के लिए कौन प्रेरित कर रहा है जिसके कारण बहुत ही तेजी से जर्मनी के ये छोटे-छोटे टाउंस सनातन धर्म की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति को अपनाते जा रहे हैं तो चलिए देखते हैं तो दोस्तों यह है जर्मनी का व इलाका जहां पर सबसे ज्यादा जर्मन हिंदू मौजूद हैं और जर्मनी के इस डेंस रीजन में बसे इस हिंदू गांव का नाम है गोलोक धाम जहां पर रहने वाले जर्मन हिंदुओं को गोलोक धाम भी बोला जाता है यानी कि गोलोक धाम में रहने वाले लोग गोलोक धाम एक संस्कृत शब्द है जिसका हिंदी में अर्थ होता है गायों का संसार संस्कृत शब्द गोलोक का तात्पर्य गाय से है और लोक का अनुवाद क्षेत्र के रूप में किया गया है क्योंकि भगवान श्री कृष्ण को गोलोक बिहारी के रूप में भी जाना जाता है और यहां पर बिहारी का अर्थ निवासी से है तो यहां से आप यह अंदाजा लगा सकते हो कि जर्मनी के इस हिंदू गांव का नाम गोलोक क्यों रखा गया है 

जहां पर गोलोक धाम के जर्मन हिंदू कीर्तन करते हुए अक्सर दिखाई देते हैं और इसके साथ ही यहां पर एक नदी की शांतिपूर्वक बहती हुई धारा भी मौजूद है जहां पर नाचते हुए भोरे तितलियां और चह चाते हुए पक्षियों की भीड़ दिखाई देती है तो मेरे इस वर्णन से आप यह साफ-साफ समझ गए होंगे कि गोलोक धाम जर्मनी की कितनी सुंदर और मनमोहक लोकेशन पर मौजूद है 

सच्चिदानंद स्वामी और इस्कोन का योगदान

अब सोचने वाली बात यह है कि जर्मनी में यह हिंदू गांव किसने और कब बनाया और यहां पर रहने वाले जर्मन हिंदुओं को सनातन धर्म को अपनाने और प्रमोट करने के लिए यहां पर कौन प्रेरित कर रहा है तो जर्मनी का यह गांव बनाया गया था आज से लगभग 27 साल पहले यानी कि सन 1996 में इस्कोन के कृष्ण भक्तों के द्वारा इस गांव को श्री श्री राधा मदन मोहन टेंपल के साथ स्थापित किया गया था और तब से गोलोक धाम में सुबह और शाम हर रोज भगवान श्री कृष्ण और भगवान श्री राम का कीर्तन होता आ रहा है हर रोज भगवत गीता का पाठ करवाया जाता है जर्मन हिंदुओं को संस्कृत सिखाई जाती है हर रोज संस्कृत मंत्रों का उच्चारण करवाया जाता है और आयुर्वेदिक ज्ञान दिया जाता है ताकि यहां का रहन सैन पूरी तरह से सनातन के प्राचीन वैदिक नियमों पर आधारित हो सके 

पर दोस्तों यह सब बिल्कुल भी संभव नहीं हो पाता अगर एक जर्मन श्रीमद् भगवत गीता को जर्मन भाषा में ट्रांसलेट नहीं करता तो तो मिलिए सचिनंदन स्वामी से जो सालों से जर्मनी के इस हिंदू गांव को अपने वैदिक ज्ञान से दिशा निर्देश दे रहे हैं इनका जन्म जर्मनी की एक वेल सेटल्ड फैमिली में हुआ था जहां पर यह अपना जीवन आराम से गुजार सकते थे पर सन 1970 में अपनी महज 16 साल की छोटी सी उम्र में जब इन्होंने जर्मन टीवी पर इस्कोन के कृष्ण भक्तों को भगवान की भक्ति में नाचते और गाते हुए देखा तो तब इनको इस्कोन भक्तों का यह दृश्य इतना मनमोहक और परल लगा कि इन्होंने अपनी 16 साल की छोटी सी एज में इसको ज्वाइन करके भगवान श्री कृष्णा की भक्ति में लीन होने का फैसला किया और इस्कोन जवाइन करने के बाद इन्होंने भगवत गीता पढ़ी जिसके बाद इनका जीवन पूरी तरह से बदल गया और इसके बाद सचिनंदन स्वामी ने भगवत गीता को जर्मनी में ट्रांसलेट किया जिससे जर्मनी के हजारों लाखों लोग भगवत गीता को पढ़कर अपना जीवन सफल बना पाए और सनातन धर्म को अपना पाएं जिसके कारण जर्मनी में गोलोक धाम हिंदू गांव की स्थापना हो पाई और दोस्तों सचिनंदन स्वामी की भगवान श्री कृष्ण की भक्ति के साथ-साथ सनातन धर्म के दूसरे देवी देवताओं में कितनी ज्यादा आस्था है इसका अंदाजा आप यहां से लगा सकते हो कि सचिनंदन स्वामी भारत के धार्मिक स्थलों की यात्रा कर चुके हैं

जैसे कि बद्रीनाथ केदारनाथ, गंगोत्री ,माउंट ,कैलास और तिरुपति जैसे पवित्र स्थलों पर यह यात्रा कर चुके हैं तो हमारा दिल से सैल्यूट है सचिनंदन स्वामी जी को जो जर्मनी में सनातन को फैलाने का काम कर रहे हैं एक बहुत ही प्रभावित और शानदार तरीके से तो अगर आप जर्मनी में हो या फिर आप कभी जर्मनी में जाओ तो गोलोक धाम हिंदू विलेज में विजिट करना बिल्कुल भी मत भूलना